सेलिब्रेटीज कि अनसूनी खट्टी मिठी यादें : गाने आज और कल के..
हेलौ दोस्तो आज मैं जो अनसूनी याद बताऊंगी वों किसी अभिनेता या अभिनेत्री के बारे मे नहीं हैं आज मे बात करूंगी पुराने और एक खूबसूरत गाने की,आज के गाने देखिए और पुराने गाने देखिए दोनो मे जमिन आसमान का फरक हैं,आज कल जो गाने बनते हैं उसमे सौं मे से बीस गाने मुश्कील से अच्छे होते हैं बाकी के 80 गाने सिर्फ देखने मे ही अच्छे होते हैं,वों भी एक दो बार देखने के लिए और कानो को सूनने के लिए भी तकलिफ देनी पडती हैं,आजकल गाीत से ज्यादा संगीत पर फोकस किया जाता हैं,डांसिग मुड को ध्यान मे रखकर गाने बनाए जाते हैं,इसलिए इसका म्युझिक इतना लाउड होता हैं कि बोल खूबसूरत होते हुए लाउड म्युझिक कि वजह से वों भी सुनाई नही देते,और कहीं गानों के बोल इतने अटपटे होते हैं के समझ नहीं आते,कितनो के बोलो के अर्थ भी मालूम नहीं होते तो उन गानो को लोंग गुनगुना भी नही सकते,और गांनो कि लाईफ इतनी छोटी होती कि आज सुना तो कल लोंग इन गानो को भूल जाते हैं,और भूल कैसे नहीं सकते इतने लाखो गाने बनते हैं उनको ना सूर हैं ना ताल है ना बोल हैं इतने गाने बनते हैं ,कभी उसमे एकाद गाना अच्छा हो तो वों भी इस गानो कि भीड मे कहीं खो जाता हैं,लेकिन दोस्तो पुराने गाने देखिए कानो को आज भी मधूर लगते हैं....
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पुराने गाने सुनो तो एक आराम सा महसूस होता हैं,ये गाने सुनते हैं तो लोंग अपने गम भूल जाये,उस जमाने मे म्युझिक मे एक ठहराव था, लाउड म्युझिक से ज्यादा गाने के बोल और आवाजो पर ध्यान दिया जाता था,फिर वों रोमॅन्टीक सॉग,'प्यार हुआ इकरार हुआ' हो या फिर दर्द भरे गीत, 'तेरा जाना' या 'हम थे जिनके सहारे' इन सब गानो मे ठहराव था,ऐसा नही उस वक्त मस्ती भरे गाने उछलकुद वाले गाने नही होते थे,अपने किशोर दा माहीर थे ऐसे मस्ती भरे गाने बनाने मे और कंपोझ करने में,उनके गानो को देखकर और सुनकर लोंग पागल हो जाते थे,झूम उठते थे 'जैसे गाना एक चतूर नार' हो या 'झूम झूम चिल्ला के' या 'नाच मेरी जान' पटा पट....
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'और फिर अपने शम्मी कपूर उछल कुद वालें गानो के लिए फेमस थे, 'कोई मुझे जंगली कहे' 'हम से अच्छा कौन है' इन गानो मे तो शम्मी कपूर जी ने धूम मचा दि थी.....
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लेकिन फिर भी उन गानो मे सभ्यता थी,ना उन गानो मे विवादास्पद बोल थे नाही अश्लिल हरकते थी नाही कानो को खटके ऐसा लाउड संगीत था सिर्फ और सिर्फ मनोरंजन था और लोंगो के दिलों को छू जाये ऐसा संगीत था,मिठी आवाजें थी,और गीत सूनकर बेसूरा भी खुद को गुनगुनाने से रोक ना सके ऐसे सिधे सादे और मिठे बोल थे,इसलिए तो 60,70 सालो बाद भी लोंग इन गानों को उतने हीं उत्साह के साथ देखते और सूनते हैं,इतने बरसो बाद भी पुराना संगीत जिंदा हैं,लोंग आज तक इन गानो को भूला ना सके हैं.......
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इसिलिए तो कहते हैं ओल्ड ईज गोल्ड..तो दोस्तो गाने आज और कल के ये मेरा आर्टीकल कैसा लगा,मै उम्मिद करती हूँ अच्छा ही लगा होंगा,अगली बार फिर मिलूँगी नये सब्जेक्ट के साथ तब तक बाय बाय.......
तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
हाँ तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
जब कभी भी सुनोगे गीत मेरे
संग संग तुम भी गुनगुनाओगे
हाँ तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
हो तुम मुझे यूँ
वो बहारें वो चांदनी रातें
हमने की थी वो प्यार की बातें
वो बहारें वो चांदनी रातें
हमने की थी वो प्यार की बातें
उन नज़ारों की याद आएगी
जब ख्यालों में मुझको लाओगे
हाँ तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
हो तुम मुझे यूँ
मेरे हाथों में तेरा चेहरा था
जैसे कोई गुलाब होता है
मेरे हाथों में तेरा चेहरा था
जैसे कोई गुलाब होता है
और सहारा लिया था बाहों का
वो समा किस तरह भुलाओगे
हाँ तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
हो तुम मुझे यूँ
मुझको देखे बिना क़रार न था
एक ऐसा भी दौर गुजरा है
मुझको देखे बिना क़रार न था
एक ऐसा भी दौर गुजरा है
झूठ मानो तो पूछ लो दिल से
मैं कहूँगा तो रूठ जाओगे
हाँ तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
जब कभी भी सुनोगे गीत मेरे
संग संग तुम भी गुनगुनाओगे
हाँ तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे
हो तुम मुझे यूँ


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