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 ये प्रतियोगिता दौडने की नहीं...रूकने की..Fight against corona virus


नमस्कार कोरोना वायरस नाम का ये दिमख तेजी से फैल रहा है, 

डॉक्टर्स,नर्सेस,पुलिस, सफाई कर्मचारी सभी अपना अपना कर्तव्य बजा रहे हैं, तो दोस्तों हमें भी अपना कर्तव्य निभाना चाहिए, लेकिन कुछ लोगों का कर्तव्य मानो लग रहा है अफवा फैलाना है, जो गलत अफवाह फैलाते हैं वह शायद भूल रहे है के वो भी इसी देश में रहते हैं, इसी दुनिया में रहते हैं, और ये वायरस कोई अफवाह नहीं फैला रहा है, सच मे जहर फैला रहा है


credit: third party image reference

और वो किसीको भी हमदर्दी नहीं दिखायेगा, इसलिए कम से कम औरों के लिये नहीं तो अपने लिए ये अफवाहोंका बाजार बंद करो, अगर कुछ फैलाना ही है तो, इस वायरस से कैसे सुरक्षित रहे, सावधान रहें इसकी जानकारी फैलाये, कुछ लोग इस कोरोना वायरस से परेशान होकर भगवान,गाॅड और अल्लाह को दोष दे रहे हैं, दोस्तों कैसे हम बडी आसानी से अपनी गलतियों का दोष इश्वर पर डाल देते हैं, इस मे उस ऊपरवाले का क्या दोष है, इश्वर, गाॅड और अल्लाह कभी इंसान को बुराई का मार्ग नहीं दिखाते वह हमें अच्छाई का रास्ता दिखाते है, हमारी हमेशा सहायता करते है, ये तो इंसान की ही सजा इंसान भुगतता है, कहीं लोग गर्व से कहते हैं हम तो अपना घर साफ सूधरा रखते हैं, लेकिन अपने घर से निकाला हुवा कूडा कचरा औरों के दरवाजे पर डाल देते हैं, कितने ही पढे-लिखे लोग अपने घरों के बालकनी से कचरा नीचे फेंक देते हैं, कितने रास्तों पर, लोगों के घरों के आस-पास ठेले वाले ठेले लगाते हैं, अस्वस्थ खाना बेचते है, जब ये खाना बनाते हैं तो आस-पास के घरों मे गंदा धुंआ जाता है,घर में बैठे हुए लोगों को, रस्ते पर चलते हुए लोगों को सांस लेने में तकलीफ होती है, जब ठेले बंद कर ये घर जाते हैं तब ठेले के इर्द-गिर्द का कूडा कचरा वैसे ही रखकर चले जाते हैं, इससे कितने लोग और बच्चे बिमार हो सकते हैं, इसकी उन्हें कोई परवाह नहीं, ऐसा लगता है कि मानो हम इंसानों ने इंसानियत अपने स्वार्थ के लिये बेच दी है,

लेकिन इंसान ये क्यों भूल जाते हैं, के हम दुनिया के मालिक नहीं है, हमारे उपर एक और विधाता है वो है भगवान याने कुदरत, जब कुदरत की लाठी चलती है तब इंसानों की नहीं चलती, कुदरत हमें जिंदगी देता है और हमारी सेहत का खयाल रखता है, लेकिन हम उसके विपरीत करेंगे तो एसा कहर टूट पडता है, हमने कुदरत की परवाह नहीं की,स्वच्छता नहीं रखी तो आज हमारा जिवन ठप्प हो पडा है, दुकानें बंद है, इन ठेले वालों के ठेले बंद पडे है, इन के पास कमाई का साधन नहीं है, बस दुख इस बात का होता है के जो बेकसूर है जो कीसी को तकलिफ ना देते हुए कमा ते है, वो भी इस आग में जल रहे हैं..


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अब ये देखिये सरकार ने सख्त ताकीद दि है के लोग घरों से बाहर ना निकले, और ये सही भी है, अगर इस खतरनाक वायरस का खातमा जल्दी से जल्दी होना चाहिए तो हमें सुरक्षा के तौर पर शासन का पालन करना ही होगा, लेकिन कहीं लोग ऐसे हैं जिन्हें घर बैठना मंजूर नहीं, कहीं यो को मैंने कहते सुना है के हम क्या जानवर है जो पिंजरे में कैद हो कर रहेंगे, ये बात मैं सुनती हूँ तो मेरे दिल मे एक बात आती है, पहले लोग बेजुबान जानवरों को कैद कर रखते थे पिंजरे में घर में बंद कर रखते थे, उनसे अपना दिल बहलाते थे, लेकिन आज पशु-पक्षी खुले आसमान में घूम रहे है और इंसान न चाहते हुए भी घर में कैद है, ये कुछ चंद लोग है लेकिन ऐसे कितने इंसान है जो आज भी इंसानियत नहीं भूले हैं जिसका सबूत हमने कर्फ्यू के वक्त देखा, जो अपना कर्तव्य नीभा रहे थे, अपने आस-पास सफाई रखते हैं, मेरी सभी से यही प्रार्थना है जो हो गया सो हो गया अब हम सब नई शुरुआत करते हैं, दिये हुए शासन का पालन करते हैं,credit: third party image reference

हमारे वजह से दूसरे को तकलिफ ना हो उसका ध्यान रखते हैं, दोस्तों बेशक कोरोना वायरस नाम की यह एक अजीब प्रतियोगिता है, ये प्रतियोगिता दौडने की या चलने की नहीं है रूकने की है थमने की है, इस मे भाग लेने वाला जितना रूकेगा थमेगा वही विजयी होगा,और पहली बार इस प्रतियोगिता का विजेता अपने साथ और को भी विजयी करेगा..


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तो चलिये दोस्तों हमें इस कोरोना वायरस नाम के दिमख को जड से निकालने के लिए इस प्रतियोगिता में भाग ले....

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