अमीर खान ने एक सीन को परफेक्ट बनाने के लिए किया कुछ ऐसा, जान कर चौक जायेंगे आप..
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| Amir khan unknown facts |
दोस्तों आज मे जिस अभिनेता के बारे बात करूंगी वो अभिनेता आज के पिढी का सफल अभिनेता हैं, लेकिन उसके काम करने का तरीका हर किसी को पंसद आता हैं, वैसे हर अभिनेता और अभिनेत्री कि खासियत होती है, उनका एक जायका होता हैं, कोई कोमेडी किंग से जाना जाता हैं, तो कोई ट्रेजेडी किंग से, तो कोई रोमांटिक हीरो मे टाईप कास्ट होकर रह जाते हैं, लेकिन ये जो कलाकार हैं, उन्होंने कभी खुद को टाईप कास्ट नहीं होने दिया, इस से पता चलता हैं के उनके अंदर के कलाकार मे कितनी भुक थी, औंर उन्होंने अपने अंदर के कलाकार के साथ पूरा न्याय किया, वैसे वह भी पहले चोकलेट बाँय के इमेज मे बंध गए थे लेकिन वो उस से संतुष्ट नहीं थे, फिर उन्होंने अपने आप को हर किरदार मे कुछ ऐसा ढाला,के वो बन गए मिस्टर परफेक्शनिस्ट जी मै आमिर खान कि बात कर रही हूँ, और दोस्तों अमीर कि और एक खूबी हैं वो अपना काम बडी ही परफेक्शन से करते है, ऐसे देखा जाये तो इस बात कि उनके सह कर्मियों को परेशानी होती हैं, लेकिन आमिर खान जब तक अपने काम से खुश नही होते, उन्हें उस बात का फर्क नहीं पडता, हैरानी कि बात ये हैं, के इस परफेक्शन कि आदत कि वजह से उन्हें खुद को कितनी बार मुसीबत का सामना करना पडता हैं,
Actor amir khan unknown facts
ऐसा ही एक वाकया मै आपको बताऊँगी, दरसल हुआ यूं के फिल्म 'गुलाम' का क्लाइमेक्स सीन 10 से 12 दिनों तक शूट किया गया, यह एक फाइट सीन था जिसमें आमिर खान को खलनायक ने बहुत पीटना था, जिसके चलते आमिर के चेहरे पर बहुत सारा खून और गंदगी जमा हो जाती हैं, जिसके लिए अपना मेकअप भी उन्होंने बढीया तरीके से करवाया था, के दर्शकों को भी ऐसा लगे के सच मे वो घायल हो गए हैं, लेकिन फिर अमीर ने सोचा के इस सब मेहनत का फायदा क्या, जब तक शुटिंग चलेगी तब तक रोज नया मेकअप करेंगे तो उस मे कृत्रिमता लगेगी, तब उन्होंने एक बेहतरीन आयडिया निकाला, उन्होंने क्लाइमेक्स पूरे होने तक अपने चेहरे के लुक की सटीकता और स्थिरता बनाए रखने के लिए बारा दिनों तक नहाया नहीं और अपना चेहरा भी साफ नहीं करवाया, तो देखिए दोस्तों हमे सुनने मे इतना अटपटा लग रहा हैं तो अमीर खान को करने मे कितनी परेशानी हूई होगी, इसीलिये आज उन्हें यूं ही नहीं मिस्टर परफेक्शनिस्ट कहा जाता हैं, दोस्तों मै जब भी किसी कलाकार कि कहानी बताती हूँ, तब मै बताने के लिए नहीं बताती, मै आपको कुछ उस कहानी पिछे का सार भी बताती हूं, उस कहानी बताने का मेरा मकसद यही होता हैं के आपको और मुझे उस कहानी से कुछ सिखने को मिले, आज हमें इस कहानी से ये सिखने को मिला, हमे हमेशा तरक्की कि चाह होती हैंं,मगर हमे शौहरत तभी मिलती हैं जब हम पूरी शिद्दत से उसके लिए मेहनत करते हैं..और कहीं बार तो ऐसा होता हैं हमें वो मकाम पाने के लिए कितने इम्तिहान देने पडते हैं..
मगर आखिर मै जब हम कामयाब होते हैं तो हमें अपनी सही हुई हर तकलीफ कम लगती हैं और तरक्की कि खुशी बेमिसाल होती हैं.... तो दोस्तों आपको ये मेरा आर्टिकल कैसा लगा मुझे बताईये.. मैं आपसे फिर मिलूंगी तब तक बाय बाय....
#entertaintment


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